अर्पण जैन "अविचल"/ सूचना और संचार क्रांति के दौर में आज प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच वेब पत्रकारिता का चलन तेजी से बढ़ा है और अपनी पहचान बना ली है. अखबारों की तरह बेव पत्र और पत्रिकाओं का जाल, अंतरजाल पर पूरी तरह बिछ चुका है. छोटे-बड़े हर शहर से अमूमन बेव पत्रकारिता संचालित हो रही है. छोटे-…
Blog posts : "जानकारी"
वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य
निःशक्तजनों से संबंधित घटनाओं के बजाय मुद्दों को उठाए मीडिया
संबंधित एक्ट की स्थिति बिहार में चिंताजनक : पिंचा
पटना। मीडिया ने विकलांगों की आवाज को हमेशा बुलंद किया है लेकिन इवेंट अर्थात् घटनाओं पर आधारित नहीं इशू अर्थात् उनके मुद्ददों-मसलों को लेकर सपोर्ट करे तो बेहतर होगा। यह बात मुख्य सचिवालय परिसर स्थित अनुसूचित जाति/जनजाति सभागार में संवाददाताओं को सं…
आज विश्व रेडियो दिवस
रेडियो की पहुंच दुनिया भर में सबसे अधिक श्रोताओं तक
आज विश्व रेडियो दिवस मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य रेडियो के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करना, इसके माध्यम से सूचनाओं तक पहुंच बढ़ाना और प्रसारकों के बीच नेटवर्किंग को बढ़ावा देना है। रेडियो अभी भी एक ऐसा माध्यम बना हुआ है, जिसकी पहुंच दुनिया भ…
पत्रकारिता कोश 2013 के प्रकाशन हेतु भेजें नाम
मुंबई। भारत की प्रथम मीडिया डायरेक्टरी "पत्रकारिता कोश" के 13वें अंक का प्रकाशन जनवरी, 2013 में होगा। लगभग 900 पृष्ठों पर आधारित इस बहुपयोगी पत्रिका के प्रकाशन के लिए मुंबई सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रकाशित होने वाले विविध भाषाओं के समाचारपत्र - पत्रिकाओं / समाचार चैनलों, आदि के साथ - साथ उन…
अरविंद लैक्सिकनः इंटरनेट को हिंदी का अनूठा उपहार
अरविंद कुमार ‘माधुरी’ और ‘सर्वोत्तम’ जैसी लोकप्रिय हिंदी पत्रिकाओं के संपादक रहे है
नवीनतम ---
- कैमरे में दर्ज एक दौर की जीवंत गाथा
- सदस्यों की समस्याओं के निवारण के लिए नियमित बैठक
- शीघ्र होगा सभी जिला इकाइयों का गठन
- डब्ल्यूजेएआई बिहार अगस्त में आयोजित करेगा राज्यस्तरीय कार्यक्रम
- झारखंड में डब्ल्यूजेएआई की नई टीम गठित
- एमसीयू में तनाव प्रबंधन पर कार्यक्रम
- अमरनाथ झा : पत्रकारिता से नदी-पानी के जनसरोकार तक की अविस्मरणीय यात्रा
- डब्ल्यूजेएआई बिहार प्रदेश की नई कार्यकारिणी का गठन
- डॉ. अंबेडकर का बौद्ध धर्मांतरण एक प्रयोग था जो फेल हो गया
- आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों के विरुद्ध बिहार पुलिस की कार्रवाई
- एक इंजीनियर के आगे हांफती मीडियाकर्मी की भाषा
- कॉस्ट्यूम पत्रकारिता के दौर में साख की चिंता किसे है
- स्मृति कल्प का आयोजन 14 जून को
- अपने समय से संवाद का नाम है ‘संजय उवाच’
- पत्रकार या 'पत्थरकार'
- माना कि अंधेरा घना है, पर एक दीया जलाना कहाँ मना है!
- मिशन, बाजार और साख का संकट
- हिंदी पत्रकारिता निश्चित रूप से और आगे बढ़ेगी
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टिप्पणी--
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सुख मंगल सिंहJuly 4, 2026
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कैलाश दहियाJuly 3, 2026
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Kailash DahiyaJuly 3, 2026
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Omprakash KashyapJune 30, 2026
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foo barMarch 2, 2025
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रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
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पंकज चौधरीDecember 17, 2024
सम्पादक
डॉ. लीना

