मई दिवस समाज के उस वर्ग के नाम है जिसके कंधों पर सही मायने में विश्व की उन्नति का दारोमदार होता है
निर्भय कर्ण / हंसी-हंसी में कहा जाता रहा है कि मजदूर वह है जो मजे से दूर होता है यानि कि मजदूर का मनोरंजन से दूर-दूर तक रिश्ता नहीं होता। देखा जाए तो यह कहावत भले ही हंसी-मजाक में कही गयी हो लेकिन इसक…

