कविता संग्रह- 'राजधानी में एक उज़बेक लड़की' की समीक्षा
समीक्षक- शहंशाह आलम/ कविता सड़ रहे समय के सबसे अधिक विरुद्ध रहती है। यह किसी भी कवि-समय के लिए सुखद होता है, जब उस कवि की कविताएँ बजबजा रहे समय के मुख़ालिफ़ सीना ताने खड़ी दिखाई देती हैं। अरविन्द श्रीवास्तव समकालीन हिंदी कविता के उन कवियों में…












