जिस पेशे में न नौकरी का सिस्टम है, न वेकैंसी का है उसमें आप भेंड की तरह आएँगे तो आप समझिये
रवीश कुमार/ मेरे प्यारे प्रेरितों,
आज कल पत्रकारिता की पढ़ाई की कई दुकानें खुल गईं हैं। इन दुकानों की दुकान चलती रहे इसलिए अब इनकी भी रेटिंग होने लगी है। इनकी रेटिंग के नाम पर पत्रिकाओं की दुकान चलाती र…













