डॉ. लोकेन्द्र सिंह / भारत में महापुरुषों की एक लंबी शृंखला है। भारत के सुदीर्घ इतिहास के प्रत्येक कालखंड में हमें ऐसे नायक दिखाई देते हैं, जिन्होंने भारतीय समाज का मार्ग प्रशस्त किया। ऐसे में कुछ नायकों को चुनना और उनके व्यक्तित्व पर लिखना, अत्यंत कठिन कार्य है। अपने लेखन के दौरान प्रो. संजय द्विवेदी समय-समय पर भारत के नायकों के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर लिखते रहे हैं। उनमें से ही 11 नायकों का चयन करके उन्होंने एक पुस्तक तैयार की है, जिसका नाम है- ‘11 महानायक’। ‘संस्मय प्रकाशन’ से प्रकाशित पुस्त…
भारतीय विचार के मजबूत स्तंभ ‘11 महानायक’
नवलकिशोर स्मृति आलोचना सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित
30 मार्च 2026 तक प्रविष्टियां भेजी जा सकेंगी
दिल्ली। हिन्दी साहित्य और संस्कृति की पत्रिका बनास जन ने विख्यात आलोचक प्रो नवलकिशोर की स्मृति में आलोचना सम्मान के लिए प्रविष्टियाँ आमंत्रित की हैं। बनास जन द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि यह सम्मान प्रतिवर्ष गद्य साहित्य पर आलोचना अथवा वैचारिक आलोचना के लिए दिया जाएगा। इस सम्मान में प्रविष्टि के लिए आलोचक को लगभग 40000 (चालीस हजार शब्दों) का एतद विषयक आलेख भेजना होगा। आलेख मौलिक और अप्रकाशित अप्रसारित होना चाहिए। प्रविष्टि भेज रहे आवेदक की…
भाषा जोड़ती है, तोड़ती नहीं
11 दिसंबर भारतीय भाषा दिवस पर विशेष
डॉ. लोकेन्द्र सिंह/ जब कहीं से यह समाचार पढ़ने/ सुनने को मिलता है कि मराठी, तमिल, तेलगू या अन्य कोई भाषा नहीं बोलने के कारण व्यक्ति के साथ मारपीट कर दी गई, तो दु:ख होता है कि संकीर्ण राजनीति हमें किस दिशा में लेकर जा रही है। हम अपनी ही भाषाओं का सम्मान क्यों नहीं कर रहे हैं? जो भाषाएं आपस में जुड़ी हैं, उनके नाम पर हम एक-दूसरे से दूर क्यों हो रहे हैं? भारत की सभी भाषाओं के शब्द भंडार एक-दूसरे के शब्दों से समृद्ध हैं। हमें तो भाषायी विविधता का उत्सव मनाना चाहि…
विज्ञापन क्षेत्र का ‘अ से ज्ञ’ सिखाती है- विज्ञापन का जादू
मीडिया शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी की पुस्तक है ‘विज्ञापन का जादू’
लोकेन्द्र सिंह/ मीडिया शिक्षक डॉ. आशीष द्विवेदी अपनी पुस्तक ‘विज्ञापन का जादू’ में लिखते हैं- “विज्ञापन की दुनिया बड़ी अनूठी और अजीब है। यदि हम इसको समझना चाहते हैं तो शुरुआती दौर से ही उसके अंदर झांकना होगा। जब तक हमारी विज्ञापन को लेकर सारी अवधारणाएं स्पष्ट नहीं हो जातीं, हम विषय की खोह में नहीं जा सकते”। यह सही बात है कि विज्ञापन की अवधारणा को समझना है, तब उसकी दुनिया के हर हिस्से से परिचित होना जरूरी है। डॉ. आशीष द्विवेदी ने …
साहित्यकारों ने राजभाषा पुरस्कारों की पद्धति पर उठाये सवाल
मुख्यमंत्री को पत्र लिख, 2023-24 के प्रदत्त पुरस्कार रद्द किये जाने सहित कई मांगें साहित्यकारों ने की
पटना/ अनंत/ 23 अगस्त को बिहार राजभाषा विभाग द्वारा दिये जाने वाले साहित्य सम्मान को लेकर विवाद छिड़ गया है। पुरस्कार घोषित किये जाने को लेकर विभाग सावधानी बरत रहा है, लेकिन जैसे ही दिनकर सम्मान दिये जाने की सूचना कवि/पत्रकार विमलकुमार को पत्र द्वारा प्राप्त हुआ उन्होंने यह पुरस्कार लौटाने का पत्र विभाग को भेजा और सोशल मीडिया पर जारी कर दिया।
इन पत्रों के आने के बाद पटना के साहित्यकारों ने …
डायबिटीज का इलाज गुलाब जामुन से संभव है!
इस चेतावनी से सजग करती प्रो मनोज कुमार की किताब "टारगेटेड जर्नलिज्म"
संजय सक्सेना/ नैतिक आचरण पर आधारित परिवार की अगली पीढ़ी अगर मूल्यविहीन हो जाये, तो जो पीड़ा घर के सबसे बड़े बुजुर्ग की होती हैं, उसी दर्द को महसूस करने का नाम है, प्रो मनोज कुमार की नई किताब "टारगेटेड जर्नलिज्म"।
यह किताब कल ही मेरे हाथ में आई है। लेखक एवं प्रोफेसर भाई मनोज कुमार से मेरा तीन दशक पुराना संबंध है। मैंने पत्रकारिता का ककहरा पहले दिन से इनके सानिध्य में बैठकर शुरू किया है। जब मैंने 1991 में पत्रकारिता में पहला …
एक बेहतरीन फोटो जर्नलिस्ट के साथ बेहतरीन इंसान भी
स्मृति शेष: सुबोध सागर (26 अप्रैल 2025 को निधन)
कुमार कृष्णन/ सुबोध सागर एक नाम प्रेस फोटोग्राफी की दुनिया का। छह दशक तक अखबारों और पत्र पत्रिका के लिए पूरे जुनून और समर्पण के साथ सभी तस्वीरें लीं, खबरों का कवरेज किया। सुबोध सागर की खींची तस्बीरें के कायल बिहार के बड़े बड़े संपादक होते थे। कारण यह था कि वे फोटोग्राफर नही फोटो जर्नलिस्ट थे। उनमें मजबूत तकनीकी कौशल तो था ही,साथ ही दृश्य कहानी कहने की क्षमता भी थी। सबसे बड़ा गुण समय-सीमा के प्रति दृढ़ता था। तभी तो चाहे नवभारत टाईम्स के संपादक…
मीडिया साहित्य की और रचनायेँ--
- पत्रकार उमेश उपाध्याय की स्मृति में 'मीडिया विमर्श' का अंक प्रकाशित
- मैं मीडिया हूँ
- पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का दस्तावेज है – ‘...लोगों का काम है कहना’
- तीन श्रेष्ठ कवियों की पत्रकारिता का आकलन
- लोकमंगल के संचारकर्ता हैं नारद
- Movies often show corrupt politicians
- शिवाजी के किलों की कहानी बताती है ‘हिन्दवी स्वराज्य दर्शन’
- सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही नफ़रत एक सुनियोजित षड़यंत्र ?
- लोकहृदय के प्रतिष्ठापक आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
- रामसिंह की ट्रेनिंग
- कुछ तो लोग कहेंगे...लोगों का काम है कहना
- अलविदा फोटो जर्नलिस्ट राजीव
- पत्रकारों की असमय मृत्यु का राज़ !
- एक पत्रकार जो रिपोर्ट लिखने और लोगों की जान बचाते शहीद हो गया
- भीड़ में अकेले पुष्पेंद्र
नवीनतम ---
- लोकमंगल के लिए था देवर्षि नारद का संवाद : प्रो. संजय द्विवेदी
- हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष पर मीडिया महाकुंभ 8 मई से
- भारतीय विचार के मजबूत स्तंभ ‘11 महानायक’
- विकास और सुशासन के मुद्दों पर भी काम करे मीडिया
- भारतीय पत्रकारिता को कलंकित करता गोदी मीडिया
- डब्ल्यूजेएआई झारखंड कमिटी गठित
- अजातशत्रु अच्युतानंद!
- मीडिया इंडस्ट्री और अकादमिक जगत में विमर्श जरुरी: अच्युतानंद
- डब्ल्यूजेएआई, बिहार के कार्यकारी अध्यक्ष बने अक्षय आनंद
- न्यूज एजेंसी के साथ पुलिसिया दुर्व्यवहार
- पत्रकारिता की सीमाएं
- सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने टीवी रेटिंग पर रोक लगाई
- पत्रकार संजय त्रिपाठी का निधन
- नर्मदाप्रसाद उपाध्याय और अतुल तारे को मिला 'हिन्दी गौरव अलंकरण 2026'
- सात वर्षों में शून्य शिकायत, संगठन के लिए गर्व का क्षण
- संस्कृति के उत्थान में कलाकारों एवं पत्रकारों की महती भूमिका : प्रिया मल्लिक
- हो सके तो फिर पत्रकारिता शुरू कीजिए!
- पत्रकार आशीष ऋषि को नोटिस पर डब्ल्यूजेएआई की गंभीर आपत्ति
वर्गवार--
- feature (45)
- General (179)
- twitter (2)
- whatsapp (3)
- अपील (8)
- अभियान (10)
- अख़बारों से (5)
- आयोजन (103)
- इंडिया टुडे (3)
- खबर (1739)
- जानकारी (5)
- टिप्पणी (1)
- टीवी (3)
- नई कलम (1)
- निंदा (4)
- पत्र (2)
- पत्रकारिता : एक नज़र में (2)
- पत्रकारों की हो निम्नतम योग्यता ? (6)
- पत्रिका (45)
- पुस्तक समीक्षा (48)
- पुस्तिका (1)
- फेसबुक से (240)
- बहस (16)
- मई दिवस (2)
- मीडिया पुस्तक समीक्षा (23)
- मुद्दा (523)
- लोग (10)
- विरोधस्वरूप पुरस्कार वापसी (6)
- विविध खबरें (616)
- वेकेंसी (14)
- व्यंग्य (31)
- शिकायत (16)
- शिक्षा (11)
- श्रद्धांजलि (119)
- संगीत (1)
- संस्कृति (1)
- संस्मरण (32)
- सम्मान (17)
- साहित्य (104)
- सिनेमा (16)
- हिन्दी (5)
पुरालेख--
- May 2026 (2)
- April 2026 (7)
- March 2026 (4)
- February 2026 (9)
- January 2026 (7)
- December 2025 (8)
- November 2025 (5)
- October 2025 (5)
- September 2025 (8)
- August 2025 (12)
- July 2025 (11)
- June 2025 (7)
- May 2025 (35)
- April 2025 (18)
- March 2025 (20)
टिप्पणी--
-
foo barMarch 2, 2025
-
रवि अहिरवारJanuary 6, 2025
-
पंकज चौधरीDecember 17, 2024
-
Anurag yadavJanuary 11, 2024
-
सुरेश जगन्नाथ पाटीलSeptember 16, 2023
-
Dr kishre kumar singhAugust 20, 2023
-
Manjeet SinghJune 23, 2023
सम्पादक
डॉ. लीना
