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मीडियामोरचा

___________________________________पत्रकारिता के जनसरोकार

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पत्रकार या 'पत्थरकार'

निर्मल रानी/ पेरिस-आधारित अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा वार्षिक रूप से जारी किये जाने वाले विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक के अनुसार यदि भारतीय पत्रकारिता की  रैंकिंग पर नज़र डालें तो 2026 में यह 180 देशों में 157 वें स्थान पर है। पिछले वर्ष से यह रैंकिंग 62 अंक नीचे गिरी है। यह स्थिति विश्व में भारतीय पत्रकारिता की "बहुत गंभीर" श्रेणी की तरफ़ इशारा करती है। जबकि नॉर्वे, एस्तोनिया व नीदरलैंड्स जैसे देशों के नाम इस सूची में शीर्ष पर हैं। चिंता की बात तो यह है कि पड़ोसी देशों न…

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माना कि अंधेरा घना है, पर एक दीया जलाना कहाँ मना है!

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष

प्रो. मनोज कुमार/ दो सौ साल की पत्रकारिता का स्मरण करते हुए जब हम पंडित युगल किशोर का स्मरण करते हैं, उदंत मार्तण्ड का स्मरण करते हैं तो स्वाभाविक रूप से हम अभिमान से भर उठते हैं और दो सौ साल बाद की पत्रकारिता की सीरत देखते हैं तो कम से कम अभिमान तो होता ही नहीं है। दो साल में हिंदी पत्रकारिता के पास बताने के लिए बहुत कुछ था लेकिन हमने बहुत कुछ पाने के लिए उसे खो दिया। हिंदी पत्रकारिता कहाँ दो सौ साल पहले अंग्रेजों से लोहा ले रही थी और आज हम अपने ही लोगों से लोहा…

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मिशन, बाजार और साख का संकट

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष

अभिषेक दास/ युगप्रवर्तक पंडित जुगलकिशोर शुक्ल द्वारा 30 मई 1826 को कलकत्ता (कोलकाता) से प्रकाशित 'उदंत मार्तण्ड' के साथ शुरू हुआ हिंदी पत्रकारिता का सफर अपने शानदार 200 वर्ष पूरे कर चुका है। दो शताब्दियों की इस ऐतिहासिक यात्रा में हिंदी पत्रकारिता ने औपनिवेशिक दासता के विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम की चेतना जगाने से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक में एक युगांतकारी भूमिका निभाई है। किंतु, अपने द्विशताब्दी वर्ष में खड़ी आज की हिंदी पत्रकारिता के समक्ष तकनीकी, आर्थिक औ…

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हिंदी पत्रकारिता निश्चित रूप से और आगे बढ़ेगी

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष

कमल किशोर/ हिंदी पत्रकारिता भारत के सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह न केवल सूचना का माध्यम बनी, बल्कि राष्ट्र जागरण और स्वतंत्रता संग्राम का एक शक्तिशाली हथियार भी साबित हुई। आज हिंदी समाचार-पत्रों का विशाल साम्राज्य है, लेकिन इसकी नींव 19वीं शताब्दी में पड़ी थी। हिंदी में प्रकाशित पहला समाचार-पत्र उदंत मार्तंड था, जिसका प्रकाशन 30 मई 1826 को कलकत्ता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने शुरू किया। यह साप्ताहिक पत्र था। हालांकि यह अधिक स…

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हिन्दी पत्रकारिता यानि तीन सदी की जनसंचारीय यात्रा

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष

हरेन्द्र प्रताप सिंह/ वर्ष 2026 की इस मई में हिन्दी पत्रकारिता ने दो सौ साल पूरे कर लिये। इस अवधि में हिन्दी पत्रकारिता ने तीन सदी की अपनी यात्रा पूरी की। पत्रकारिता से वह मीडिया बन गई। इस दौरान पूरी दुनिया बदल गई। पत्रकारिता का बदलना भी स्वाभाविक है। साप्ताहिक हिन्दी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड (1826) से लेकर दैनिक द्विभाषी हिन्दी अखबार समाचार सुधावर्षण (1854) तक के युग ने प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन (1857) की राष्ट्रीय नींव तैयार की और बहादुर शाह जफर को फिर से हिन्द…

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संघर्ष, चेतना और जनसरोकारों की गौरवगाथा

हिन्दी पत्रकारिता के 200 वर्ष

प्रेम कुमार/ 30 मई भारतीय पत्रकारिता के इतिहास का वह स्वर्णिम दिन है, जब देश में हिन्दी पत्रकारिता की पहली किरण फूटी थी। वर्ष 1826 में 30 मई के दिन पंडित युगल किशोर शुक्ल ने कोलकाता से हिन्दी के प्रथम समाचार पत्र 'उदन्त मार्तण्ड' का प्रकाशन शुरू किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष 30 मई को 'हिन्दी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है। वर्ष 2026 हिन्दी पत्रकारिता के लिए अत्यंत विशेष है क्योंकि इस वर्ष हिन्दी पत्रकारिता अपने गौरवपूर्ण 200 वर्ष पूरे कर रही है।

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खबर से एजेंडा तक: जब हिंदी पत्रकारिता ने बदली अपनी राह

हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष

संजय कुमार / मीडिया यानी चौथे स्तंभ की तस्वीर आज बदल चुकी है। मीडिया की पूरी दुनिया सतरंगी हो चुकी है। प्रिंट से इलेक्ट्रोनिक फिर न्यू या सोशल मीडिया और अब एआई ने बदलाव चरम पर पहुंचा दिया है। इसके बावजूद मूल पत्रकारिता कहीं न कहीं जीवंत है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता कभी एक ‘मिशन’ हुआ करता था। गणेश शंकर विद्यार्थी का ‘प्रताप’, बाबूराव विष्णु पराड़कर का ‘आज’ और प्रभाष जोशी का ‘जनसत्ता’ जैसे अखबारों की स्याही में सिर्फ खबर नहीं, जनचेतना की आवाज़ थी। पत्रकारिता…

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आईआईएमसी ने एआई अकादमी का शुभारंभ किया

एआई-आधारित मीडिया शिक्षा और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल, आज हुआ दीक्षांत समारोह, 23 शहरों के 110 से अधिक समाचार कक्षों और मीडिया पेशेवरों के लिए एआई कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल समापन का प्रतीक

नई दिल्ली/  भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) ने आज एआईएमई अकादमी (एआई मीडिया और मनोरंजन अकादमी) का शुभारंभ किया। यह देश में एआई-आधारित मीडिया शिक्षा और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। नई दिल्ली स्थित आईआईएमसी …

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मीडिया : हमको आईना दिखाना है, दिखा देते हैं

तनवीर जाफ़री/ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों संयुक्त अरब अमीरात,नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली देशों का दौरा किया। इस दौरान नॉर्वे की एक घटना ने एक बार फिर मीडिया उसके कर्तव्य व दायित्व को लेकर बहस छेड़ दी। दरअसल ओस्लो में जब मोदी, नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर के साथ जैसे ही मंच से जाने लगे उसी समय एक युवा महिला पत्रकार हेला लिंग ने मोदी को संबोधित करते हुये कुछ सवाल पूछे। हेला लिंग ने पूछा  "प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से सवाल क्यों नहीं लेते? मोदी पत…

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विश्वसनीयता के लिए "विराम नियम" अपनाने की आवश्यकता

‘डिजिटल पत्रकारिता के दौर में नैतिकता’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन

पटना/ पटना कॉलेज (पटना विश्वविद्यालय) के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में 21 मई को ‘डिजिटल पत्रकारिता के दौर में नैतिकता’ विषय पर एक एकल व्याख्यान का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य प्रो.( डॉ) अनिल कुमार ने की, जबकि पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के समन्वयक डॉ. सूर्यनाथ सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया।

व्याख्यान में वरिष्ठ पत्रकार व शिक्षाविद डॉ ध्रुव कुमार ने कहा कि डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के …

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सम्पादक

डॉ. लीना


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अपने समय से संवाद का नाम है ‘संजय उवाच’

डॉ. लोकेन्द्र सिंह/ मीडिया प्राध्यापक एवं लेखक प्रो. संजय द्विवेदी की नई पुस्तक ‘संजय उवाच’ उनके चुनिंदा और सारगर्भित भाषणों का उत्कृष्ट संग्रह है। अकादमिक जगत से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों में उन्हों…

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पत्रकार राजेश अवस्थी की खुदकुशी और रिटायर पत्रकारों की हालत

मेरठ में 65 साल के एक रिटायर्ड पत्रकार राजेश अवस्थी पार्क में घूमने के लिए बाहर निकले. पार्क में एकांत में ऐसी जगह जाकर बैठ गए, जहां कोई देख नहीं सके. फिर सल्फास की गोलियां गटक लीं. परिवार बाहर गया था. शाम और रात को परिवार ने मोबाइल फोन मिलाया तो ये बंद मिला. अगले दिन उनका शव वहीं मिला. लंबे कद के र…

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सोशल मीडिया से --

महंगा होता जीवन सस्ता होता लेखन

प्रियदर्शन / 1. साल 1993 में मैं दिल्ली आया था- अगले तीन साल मैंने फ़्रीलांसिंग की। 1995 में शादी की तब भी फ्रीलांसर ही था- एक तरह से बेरोज़गार। स्मिता के घरवाले परेशान थे कि लड़का करता क्या है। लेकिन फ्रीलांसिंग में मैं भी फिर भी इतने पैसे कमा लेता था कि छोटी-मोटी नौकरियों के प्रस्ताव ठुकरा सकूं।

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डब्ल्यूजेएआई झारखंड कमिटी गठित

दीपक ओझा बने कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष, राजीव उपाध्यक्ष और पूर्णेंदु पुष्पेश बने महासचिव,  राज्य में जल्द होगा मीडिया समिट का आयोजन

रांची। वेब जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूजेएआई) के झारखंड…

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अख़बारों से

कैप्शन में कैप्शन

और पेज प्रभारी संपादक जी ने तस्वीर के कैप्शन में “ कैप्शन ” भी लिख डाला ... दैनिक भास्कर 29 जनवरी  

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आलेख- ख़बरें और भी हैं

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शिकायत की रिपोर्ट

आपकी उपस्थिती

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बहस--

लालूजी को खलनायक बनाते तैयार हुई है सवर्ण पत्रकारों की एक पीढ़ी

जंगलराज का नैरेटिव गढ़ने में सवर्णपरस्ती को दिया प्रश्रय 

वीरेंद्र यादव / बिहार का मीडिया राजपूत, भूमिहार और ब्राह्मण प्रभाव का रहा है। 1980-90 का वह दौर था, जब कांग्रेस अवसान की ओर थी और समाजवादी व…

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पुरालेख--

पत्रिकाएँ--

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पत्रकारिता : एक नजर

वेब पत्रकारिता का चमकता भविष्य

अर्पण जैन "अविचल"/  सूचना और संचार क्रांति के दौर में आज प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच वेब पत्रकारिता का चलन तेजी से बढ़ा है और अपनी पहचान बना ली है. अखबारों की तरह बेव पत्र और पत्रिकाओं का जाल, अंतरजाल पर पूरी तरह बिछ चुका है. छोटे-बड़े हर शहर से अमूमन बेव पत्रकारिता संचालित हो रही है. छोटे-बड़े सभी शहरों के प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया भी वेब पर हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में थोड़े ही समय में इसने बड़ा मुकाम पा लिया ह…

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राष्ट्रीय सुर्खियां--

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